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mahabharat 12.336.41-42h: इसके बाद जब वे प्रार्थना करने लगे, तो उनकी कोलाहलपूर्ण ध्वनि हमारे कानों तक पहुँची। वे सभी तेजस्वी भगवान को पूजन सामग्री अर्पित कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  12.336.41-42h 
ततो हि वदतां तेषामश्रौष्म विपुलं ध्वनिम्॥ ४१॥
बलि: किलोपह्रियते तस्य देवस्य तैर्नरै:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद जब वे प्रार्थना करने लगे, तो उनकी कोलाहलपूर्ण ध्वनि हमारे कानों तक पहुँची। वे सभी तेजस्वी भगवान को पूजन सामग्री अर्पित कर रहे थे।
 
‘After this, when they started praying, their tumultuous sound reached our ears. All of them were offering worship materials to the radiant Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)