श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  12.336.39-40h 
अथ सूर्यसहस्रस्य प्रभां युगपदुत्थिताम्॥ ३९॥
सहसा दृष्टवन्त: स्म पुनरेव बृहस्पते।
 
 
अनुवाद
बृहस्पति! थोड़ी ही देर में हमारे सामने सहस्रों सूर्यों के समान एक तेज प्रकट हुआ। हमारी दृष्टि अचानक उसकी ओर खिंच गई। 39 1/2।
 
‘Jupiter! In a short while, a radiance like that of thousands of Suns appeared in front of us. Our sight was suddenly drawn towards it. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)