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mahabharat 12.336.37-38h: उनके मन की इस एकाग्रता से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हुए। हे मुनि! उस द्वीप पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति में प्रलयकाल के सूर्य के समान तेज था।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  12.336.37-38h 
तेनैकाग्रमनस्त्वेन प्रीतो भवति वै हरि:।
याऽभवन्मुनिशार्दूल भा: सूर्यस्य युगक्षये॥ ३७॥
एकैकस्य प्रभा तादृक् साभवन्मानवस्य ह।
 
 
अनुवाद
उनके मन की इस एकाग्रता से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हुए। हे मुनि! उस द्वीप पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति में प्रलयकाल के सूर्य के समान तेज था।
 
‘Lord Shri Hari was pleased with this concentration of their mind. O great sage! Every person living on that island had the same radiance as the Sun has during the time of deluge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)