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mahabharat 12.336.36: वह प्रतिदिन उत्तर-पूर्व कोने की ओर मुख करके हाथ जोड़कर मन ही मन ब्रह्मा का नाम जपते थे।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.336.36 
नित्याञ्जलिकृतान् ब्रह्म जपत: प्रागुदङ्मुखान्।
मानसो नाम स जपो जप्यते तैर्महात्मभि:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वह प्रतिदिन उत्तर-पूर्व कोने की ओर मुख करके हाथ जोड़कर मन ही मन ब्रह्मा का नाम जपते थे।
 
‘Every day he used to chant the name of Brahma mentally with folded hands, facing the north-east corner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)