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mahabharat 12.336.33-34h: वहाँ के निवासियों के तेज से हमारी आँखें चौंधिया गई थीं, इसलिए हम किसी को देख नहीं पा रहे थे। तब संयोगवश हमारे हृदय में यह ज्ञान जागृत हुआ कि तपस्या किए बिना हम ईश्वर के दर्शन सहज में नहीं कर सकते।'   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  12.336.33-34h 
न च पश्याम पुरुषं तत्तेजोहृतदर्शना:।
ततो न: प्रादुरभवद् विज्ञानं देवयोगजम्॥ ३३॥
न किलातप्ततपसा शक्यते द्रष्टुमञ्जसा।
 
 
अनुवाद
वहाँ के निवासियों के तेज से हमारी आँखें चौंधिया गई थीं, इसलिए हम किसी को देख नहीं पा रहे थे। तब संयोगवश हमारे हृदय में यह ज्ञान जागृत हुआ कि तपस्या किए बिना हम ईश्वर के दर्शन सहज में नहीं कर सकते।'
 
‘We were not able to see anyone there because our eyes were dazzled by the brilliance of the inhabitants there. Then by chance the knowledge dawned on our hearts that without performing penance we cannot see God easily. 33 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)