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mahabharat 12.336.32: श्वेत नामक महाद्वीप पर पहुँचने के बाद, हमारा मन ईश्वर में ही लगा रहा। हम उनके दर्शन के लिए तरस रहे थे। वहाँ पहुँचते ही हमारी दृष्टि क्षीण हो गई। 32.   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.336.32 
प्राप्य श्वेतं महाद्वीपं तच्चित्तास्तद्दिदृक्षव:।
ततोऽस्मद्दृष्टिविषयस्तदा प्रतिहतोऽभवत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्वेत नामक महाद्वीप पर पहुँचने के बाद, हमारा मन ईश्वर में ही लगा रहा। हम उनके दर्शन के लिए तरस रहे थे। वहाँ पहुँचते ही हमारी दृष्टि क्षीण हो गई। 32.
 
‘After reaching the continent called White, our mind remained focused on God. We were yearning to see Him. As soon as we reached there, our vision became impaired. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)