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mahabharat 12.336.31: इस दिव्य वाणी को सुनकर हम उसके बताए हुए मार्ग से उस स्थान पर गए॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.336.31 
अथ श्रुत्वा वयं सर्वे वाचं तामशरीरिणीम्।
यथाख्यातेन मार्गेण तं देशं प्रतिपेदिरे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस दिव्य वाणी को सुनकर हम उसके बताए हुए मार्ग से उस स्थान पर गए॥31॥
 
‘After listening to this heavenly voice, we went to that place by the route indicated by it.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)