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mahabharat 12.336.26-27h: ब्राह्मणों! तुमने प्रसन्न मन से तपस्या की है। तुम भगवान के भक्त हो और जानना चाहते हो कि सर्वव्यापी परमात्मा को कैसे देखा जाए?   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.336.26-27h 
सुतप्तं वस्तपो विप्रा: प्रसन्नेनान्तरात्मना॥ २६॥
यूयं जिज्ञासवो भक्ता: कथं द्रक्ष्यथ तं विभुम्।
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों! तुमने प्रसन्न मन से तपस्या की है। तुम भगवान के भक्त हो और जानना चाहते हो कि सर्वव्यापी परमात्मा को कैसे देखा जाए?
 
‘Brahmins! You have performed penance with a happy heart. You are devotees of God and want to know how to see the omnipresent Supreme Being?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)