Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.25-26h: हम बार-बार यही सोचते रहे कि श्री नारायणदेव का दर्शन हमें किस प्रकार होगा। तब व्रत के अंत में हमें आनंद देने वाली एक अशरीरी वाणी ने प्रेम से भरी हुई गम्भीर वाणी में कहा -॥25 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं पश्येम हि वयं देवं नारायणं त्विति।
अथ व्रतस्यावभृथे वागुवाचाशरीरिणी॥ २५॥
स्निग्धगम्भीरया वाचा प्रहर्षणकरी विभो।
अनुवाद
हम बार-बार यही सोचते रहे कि श्री नारायणदेव का दर्शन हमें किस प्रकार होगा। तब व्रत के अंत में हमें आनंद देने वाली एक अशरीरी वाणी ने प्रेम से भरी हुई गम्भीर वाणी में कहा -॥25 1/2॥
‘We kept thinking again and again how we will get the darshan of Shri Narayandev. Then, at the end of the fast, a bodiless voice which brought joy to us said in a deep voice full of love -॥ 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥