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mahabharat 12.336.20-21: तत्पश्चात् एकत, द्वित, त्रितने तथा चित्रशिखण्डी नामक ऋषियों ने उनसे कहा - 'बृहस्पति! हम ब्रह्माजी के मानसपुत्र कहलाते हैं। एक समय हम सब अपने कल्याण की इच्छा से उत्तर दिशा की ओर चले थे।' 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  12.336.20-21 
एकतद्वितत्रिताश्चोचुस्ततश्चित्रशिखण्डिन:॥ २०॥
वयं हि ब्रह्मण: पुत्रा मानसा: परिकीर्तिता:।
गता नि:श्रेयसार्थं हि कदाचिद् दिशमुत्तराम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एकत, द्वित, त्रितने तथा चित्रशिखण्डी नामक ऋषियों ने उनसे कहा - 'बृहस्पति! हम ब्रह्माजी के मानसपुत्र कहलाते हैं। एक समय हम सब अपने कल्याण की इच्छा से उत्तर दिशा की ओर चले थे।' 20-21॥
 
Thereafter the sages named Ekat, Dwit and Tritne and Chitrashikhandi said to him – 'Jupiter! We are called Manasputra of Lord Brahma. Once, with the desire for our welfare, we all traveled towards the north. 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)