Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.336.2: राजन! बृहत्, ब्रह्मा और महत्- ये तीनों शब्द एक ही अर्थ रखते हैं। इन तीनों शब्दों के गुण पुरोहित में विद्यमान थे; इसीलिए वे विद्वान देवगुरु 'बृहस्पति' कहलाए।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.336.2 
बृहद् ब्रह्म महच्चेति शब्दा: पर्यायवाचका:।
एभि: समन्वितो राजन् गुणैर्विद्वान् बृहस्पति:॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजन! बृहत्, ब्रह्मा और महत्- ये तीनों शब्द एक ही अर्थ रखते हैं। इन तीनों शब्दों के गुण पुरोहित में विद्यमान थे; इसीलिए वे विद्वान देवगुरु 'बृहस्पति' कहलाए।
 
Rajan! Brihat, Brahma and Mahat – these three words have the same meaning. The qualities of these three words were present in the priest; That is why that learned Devguru was called 'Brihaspati'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)