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mahabharat 12.336.19-20h: बृहस्पति! जिस भगवान को यह भाग समर्पित किया गया है, वे कभी क्रोधित नहीं होते। आप और मैं उन्हें अपनी इच्छा से नहीं देख सकते। केवल वही उन्हें देख सकता है जिस पर उनकी कृपा होती है।'॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.336.19-20h 
अरोषणो ह्यसौ देवो यस्य भागोऽयमुद्यत:।
न शक्य: स त्वया द्रष्टुमस्माभिर्वा बृहस्पते॥ १९॥
यस्य प्रसादं कुरुते स वै तं द्रष्टुमर्हति।
 
 
अनुवाद
बृहस्पति! जिस भगवान को यह भाग समर्पित किया गया है, वे कभी क्रोधित नहीं होते। आप और मैं उन्हें अपनी इच्छा से नहीं देख सकते। केवल वही उन्हें देख सकता है जिस पर उनकी कृपा होती है।'॥19 1/2॥
 
‘Brihaspati! The God to whom this part has been dedicated never becomes angry. You and I cannot see him at will. Only he who is blessed by him can see him.'॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)