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mahabharat 12.336.18: सबने शान्त भाव से उनसे कहा - 'मुनि ! आप क्रोध न करें। आपने जो क्रोध किया है, वह सत्ययुग का धर्म नहीं है ॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.336.18 
ऊचुश्चैनमसम्भ्रान्ता न रोषं कर्तुमर्हसि।
नैष धर्म: कृतयुगे यस्त्वं रोषमचीकृथा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सबने शान्त भाव से उनसे कहा - 'मुनि ! आप क्रोध न करें। आपने जो क्रोध किया है, वह सत्ययुग का धर्म नहीं है ॥ 18॥
 
Everyone calmly said to him - 'Muni! Do not be angry. The anger you have shown is not the Dharma of Satya Yuga.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)