Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.15: फिर उन्होंने राजा उपरिचर से कहा, ‘मैंने जो भाग प्रस्तुत किया है, उसे प्रभु मेरे नेत्रों के सामने प्रकट होकर स्वीकार करें, यही न्याय है, इसमें कोई संदेह नहीं है।’ ॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उवाच चोपरिचरं मया भागोऽयमुद्यत:।
ग्राह्य: स्वयं हि देवेन मत्प्रत्यक्षं न संशय:॥ १५॥
अनुवाद
फिर उन्होंने राजा उपरिचर से कहा, ‘मैंने जो भाग प्रस्तुत किया है, उसे प्रभु मेरे नेत्रों के सामने प्रकट होकर स्वीकार करें, यही न्याय है, इसमें कोई संदेह नहीं है।’ ॥15॥
Then he said to King Uparichara, 'The portion that I have presented, the Lord should appear before my eyes and accept it, this is justice, there is no doubt in it.' ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥