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mahabharat 12.336.13: भगवान हयग्रीव ने स्वयं अदृश्य रहकर अपने ऊपर अर्पित पुरोडाश को ग्रहण किया और उसे सूंघकर अपने वश में कर लिया ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.336.13 
स्वयं भागमुपाघ्राय पुरोडाशं गृहीतवान्।
अदृश्येन हृतो भागो देवेन हरिमेधसा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भगवान हयग्रीव ने स्वयं अदृश्य रहकर अपने ऊपर अर्पित पुरोडाश को ग्रहण किया और उसे सूंघकर अपने वश में कर लिया ॥13॥
 
Lord Hayagriva himself remained invisible and accepted the purodash offered to him and after smelling it, took it under his control. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)