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mahabharat 12.335.6-7h: उनसे विदा लेकर ब्रह्माकुमार नारदजी प्राचीन ऋषि नारायण की आराधना करके उत्तम योग से आकाश की ओर उड़ चले और अचानक मेरु पर्वत पर पहुँचकर अदृश्य हो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  12.335.6-7h 
ततो विसृष्ट: परमेष्ठिपुत्र:
सोऽभ्यर्चयित्वा तमृषिं पुराणम्॥ ६॥
खमुत्पपातोत्तमयोगयुक्त-
स्ततोऽधिमेरौ सहसा निलिल्ये।
 
 
अनुवाद
उनसे विदा लेकर ब्रह्माकुमार नारदजी प्राचीन ऋषि नारायण की आराधना करके उत्तम योग से आकाश की ओर उड़ चले और अचानक मेरु पर्वत पर पहुँचकर अदृश्य हो गए।
 
After taking leave from them, Brahmakumar Narada after worshipping the ancient sage Narayana flew towards the sky in perfect yoga and suddenly reached Mount Meru and disappeared. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)