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mahabharat 12.335.49: तुम्हारे द्वारा रचित यह शास्त्र समस्त शास्त्रों से श्रेष्ठ माना जाएगा। यह धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र तथा महान रहस्यवादी ग्रंथ है। 49॥   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.335.49 
एतद्धि युष्मच्छास्त्राणां शास्त्रमुत्तमसंज्ञितम्।
एतदर्थ्यं च धर्म्यं च रहस्यं चैतदुत्तमम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे द्वारा रचित यह शास्त्र समस्त शास्त्रों से श्रेष्ठ माना जाएगा। यह धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र तथा महान रहस्यवादी ग्रंथ है। 49॥
 
'This scripture created by you will be considered superior to all the scriptures. This is a book on theology, economics and a great mystical book. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)