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mahabharat 12.335.48: ‘वह राजा पुण्यात्माओं द्वारा सम्मानित होकर मेरा परम भक्त होगा और संसार में समस्त कर्म शास्त्रविधि के अनुसार करेगा॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.335.48 
स हि सद्भावितो राजा मद्भक्तश्च भविष्यति।
तेन शास्त्रेण लोकेषु क्रिया: सर्वा: करिष्यति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
‘वह राजा पुण्यात्माओं द्वारा सम्मानित होकर मेरा परम भक्त होगा और संसार में समस्त कर्म शास्त्रविधि के अनुसार करेगा॥ 48॥
 
‘That king, respected by the virtuous, will be my greatest devotee and will perform all the actions in the world according to those scriptures.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)