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mahabharat 12.335.40: प्रवृत्ति और निवृत्ति के विषय में यह ऋक्, यजुः, साम और अथर्ववेद के मन्त्रों से अनुमोदित ग्रन्थ के समान प्रामाणिक होगा ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.335.40 
प्रवृत्तौ च निवृत्तौ च यस्मादेतद् भविष्यति।
यजुर्ऋक्सामभिर्जुष्टमथर्वांगिरसैस्तथा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
प्रवृत्ति और निवृत्ति के विषय में यह ऋक्, यजुः, साम और अथर्ववेद के मन्त्रों से अनुमोदित ग्रन्थ के समान प्रामाणिक होगा ॥40॥
 
'On the subject of tendency and withdrawal, this will be as authentic as the book approved by the mantras of Rik, Yajuh, Sama and Atharva Veda. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)