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mahabharat 12.335.38: तत्पश्चात् अवर्णनीय शरीर में स्थित भगवान पुरुषोत्तम प्रसन्न होकर अदृश्य रहते हुए उन सम्पूर्ण ऋषियों से बोले- ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.335.38 
तत: प्रसन्नो भगवाननिर्दिष्टशरीरग:।
ऋषीनुवाच तान् सर्वानदृश्य: पुरुषोत्तम:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अवर्णनीय शरीर में स्थित भगवान पुरुषोत्तम प्रसन्न होकर अदृश्य रहते हुए उन सम्पूर्ण ऋषियों से बोले- ॥38॥
 
Thereafter, Lord Purushottam, present in the inexpressible body, became pleased and spoke to all those sages while remaining invisible – ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)