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mahabharat 12.335.34-35: उपर्युक्त ऋषियों ने अन्य ऋषियों के साथ मिलकर एक हजार दिव्य वर्षों तक भगवान नारायण की तपस्या की। इससे प्रसन्न होकर भगवान ने देवी सरस्वती को उनके पास भेजा। उस समय नारायण की आज्ञा से देवी सरस्वती समस्त लोकों का कल्याण करने के लिए उन सभी ऋषियों में प्रविष्ट हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  12.335.34-35 
आराध्य तपसा देवं हरिं नारायणं प्रभुम्।
दिव्यं वर्षसहस्रं वै सर्वे ते ऋषिभि: सह॥ ३४॥
नारायणानुशास्ता हि तदा देवी सरस्वती।
विवेश तानृषीन् सर्वाल्‍ँलोकानां हितकाम्यया॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त ऋषियों ने अन्य ऋषियों के साथ मिलकर एक हजार दिव्य वर्षों तक भगवान नारायण की तपस्या की। इससे प्रसन्न होकर भगवान ने देवी सरस्वती को उनके पास भेजा। उस समय नारायण की आज्ञा से देवी सरस्वती समस्त लोकों का कल्याण करने के लिए उन सभी ऋषियों में प्रविष्ट हो गईं।
 
The above-mentioned sages, along with other sages, worshipped Lord Narayana by performing penance for a thousand divine years. Pleased with this, the Lord sent Goddess Saraswati to them. At that time, by the order of Narayana, Goddess Saraswati entered all those sages to do good to all the worlds. 34-35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)