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mahabharat 12.335.32: उन्होंने मन में यह विचार करके कि अमुक साधन से जगत का कल्याण होगा, अमुक साधन से भगवान् की प्राप्ति होगी, तथा अमुक विधि से जगत् का हित होगा, शास्त्रों की रचना की। 32.   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.335.32 
इदं श्रेय इदं ब्रह्म इदं हितमनुत्तमम्।
लोकान् संचिन्त्य मनसा तत: शास्त्रं प्रचक्रिरे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने मन में यह विचार करके कि अमुक साधन से जगत का कल्याण होगा, अमुक साधन से भगवान् की प्राप्ति होगी, तथा अमुक विधि से जगत् का हित होगा, शास्त्रों की रचना की। 32.
 
Thinking in his mind that by a certain means the welfare of the world will be achieved, by a certain means God will be attained, and by a certain method the best interests of the world will be achieved, he composed the scriptures. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)