Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.335.26-27h: वह शत्रुनाशक राजा धर्मपूर्वक राज्य करते हुए कभी झूठ नहीं बोलता था, न ही उसका मन कभी बुरे विचारों से दूषित होता था। उसने अपने शरीर से कभी छोटा-सा भी पाप नहीं किया। 26 1/2 | mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य प्रशासतो राज्यं धर्मेणामित्रघातिन:।
नानृता वाक् समभवन्मनो दुष्टं न चाभवत्॥ २६॥
न च कायेन कृतवान् स पापं परमण्वपि।
अनुवाद
वह शत्रुनाशक राजा धर्मपूर्वक राज्य करते हुए कभी झूठ नहीं बोलता था, न ही उसका मन कभी बुरे विचारों से दूषित होता था। उसने अपने शरीर से कभी छोटा-सा भी पाप नहीं किया। 26 1/2
While ruling his kingdom righteously, that enemy-killing king never spoke a lie nor was his mind ever polluted by evil thoughts. He never committed even the smallest sin with his body. 26 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥