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mahabharat 12.335.24: राजन! वह सदैव सावधान रहता था और सकाम तथा नैमित्तिक यज्ञों की समस्त क्रियाओं को वैष्णव शास्त्र विधि से करता था। 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.335.24 
काम्यनैमित्तिका राजन् यज्ञिया: परमक्रिया:।
सर्वा: सात्वतमास्थाय विधिं चक्रे समाहित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह सदैव सावधान रहता था और सकाम तथा नैमित्तिक यज्ञों की समस्त क्रियाओं को वैष्णव शास्त्र विधि से करता था। 24॥
 
Rajan! He was always careful and performed all the activities of Sakam and Naimittik Yagyas according to the Vaishnav Shastra method. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)