Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.335.18: वह धर्मात्मा और पिता का नित्य भक्त था। उसमें आलस्य का सर्वथा अभाव था। प्राचीन काल में उसे भगवान नारायण से पृथ्वी का साम्राज्य प्राप्त हुआ था। 18॥ | mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह धर्मात्मा और पिता का नित्य भक्त था। उसमें आलस्य का सर्वथा अभाव था। प्राचीन काल में उसे भगवान नारायण से पृथ्वी का साम्राज्य प्राप्त हुआ था। 18॥
He was a religious soul and a daily devotee of his father. There was complete absence of laziness in him. In ancient times, he had inherited the empire of the earth from the inheritance of Lord Narayana. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥