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mahabharat 12.335.17: प्राचीन काल में इस पृथ्वी पर उपरिचर नामक एक राजा राज्य करता था। वह इंद्र का मित्र और पापनाशक भगवान नारायण का प्रसिद्ध भक्त था।   |   mahabharat अध्याय 12.335: नारदजीका श्वेतद्वीपदर्शन, वहाँके निवासियोंके स्वरूपका वर्णन, राजा उपरिचरका चरित्र तथा पाञ्चरात्रकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.335.17 
राजोपरिचरो नाम बभूवाधिपतिर्भुव:।
आखण्डलसख: ख्यातो भक्तो नारायणं हरिम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में इस पृथ्वी पर उपरिचर नामक एक राजा राज्य करता था। वह इंद्र का मित्र और पापनाशक भगवान नारायण का प्रसिद्ध भक्त था।
 
In the past, a king named Uparichara ruled over this earth. He was a friend of Indra and a renowned devotee of Lord Narayana, the destroyer of sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)