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mahabharat 12.334.5-6: भीष्म बोले, "नादान युधिष्ठिर! तुम प्रश्न पूछना अच्छी तरह जानते हो। तुमने मुझसे अब एक बहुत कठिन प्रश्न पूछा है। राजन! ईश्वर की कृपा या शास्त्रों के ज्ञान के बिना इन प्रश्नों का उत्तर केवल तर्क द्वारा सैकड़ों वर्षों में भी नहीं दिया जा सकता। शत्रुघ्न! यद्यपि यह विषय समझने में बहुत कठिन है, फिर भी मुझे इसे तुम्हें समझाना ही होगा।"   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  12.334.5-6 
भीष्म उवाच
गूढं मां प्रश्नवित् प्रश्नं पृच्छसे त्वमिहानघ।
न ह्येतत् तर्कया शक्यं वक्तुं वर्षशतैरपि॥ ५॥
ऋते देवप्रसादाद् वा राजन् ज्ञानागमेन वा।
गहनं ह्येतदाख्यानं व्याख्यातव्यं तवारिहन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "नादान युधिष्ठिर! तुम प्रश्न पूछना अच्छी तरह जानते हो। तुमने मुझसे अब एक बहुत कठिन प्रश्न पूछा है। राजन! ईश्वर की कृपा या शास्त्रों के ज्ञान के बिना इन प्रश्नों का उत्तर केवल तर्क द्वारा सैकड़ों वर्षों में भी नहीं दिया जा सकता। शत्रुघ्न! यद्यपि यह विषय समझने में बहुत कठिन है, फिर भी मुझे इसे तुम्हें समझाना ही होगा।"
 
Bhishma said, "Innocent Yudhishthira! You know very well how to ask questions. You have asked me a very difficult question now. King! Without the grace of God or the knowledge of scriptures, these questions cannot be answered even in hundreds of years through logic alone. Shatrughan! Although this subject is very difficult to understand, still I have to explain it to you. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)