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mahabharat 12.334.42: ज्ञानयोग के द्वारा मनुष्य उसे प्राप्त कर सकता है। हम दोनों उसी से उत्पन्न हुए हैं, यह जानकर हम दोनों उस सनातन परब्रह्म की उपासना करते हैं ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.334.42 
दृश्यते ज्ञानयोगेन आवां च प्रसृतौ तत:।
एवं ज्ञात्वा तमात्मानं पूजयाव: सनातनम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ज्ञानयोग के द्वारा मनुष्य उसे प्राप्त कर सकता है। हम दोनों उसी से उत्पन्न हुए हैं, यह जानकर हम दोनों उस सनातन परब्रह्म की उपासना करते हैं ॥ 42॥
 
Through the Yoga of knowledge, one can realize Him. Knowing that both of us have originated from Him, we both worship that eternal Supreme Being. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)