Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.334.38: श्रेष्ठ ब्राह्मण देवताओं और पितरों से संबंधित जो कर्म उस प्रयोजन के लिए किए जाते हैं, उन्हें भली-भाँति जानकर इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करते हैं ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैवं पित्र्यं च सततं तस्य विज्ञाय तत्त्वत:।
आत्मप्राप्तानि च तत: प्राप्नुवन्ति द्विजोत्तमा:॥ ३८॥
अनुवाद
श्रेष्ठ ब्राह्मण देवताओं और पितरों से संबंधित जो कर्म उस प्रयोजन के लिए किए जाते हैं, उन्हें भली-भाँति जानकर इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करते हैं ॥38॥
The best Brahmins, by knowing properly the activities related to gods and ancestors which are performed for that purpose, achieve the things they desire. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥