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mahabharat 12.334.35-37: ब्रह्मा, रुद्र, मनु, दक्ष, भृगु, धर्म, तप, यम, मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वशिष्ठ, परमेष्ठी, सूर्य, चंद्रमा, कर्दम, क्रोध और विकृत - ये इक्कीस प्रजापति एक ही भगवान से उत्पन्न हुए कहे जाते हैं और उसी भगवान के शाश्वत धर्म और मर्यादा का पालन और पूजा करते हैं। 35-37॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 35-37
 
 
श्लोक  12.334.35-37 
ब्रह्मा स्थाणुर्मनुर्दक्षो भृगुर्धर्मस्तपो यम:।
मरीचिरङ्गिराऽत्रिश्च पुलस्त्य: पुलह: क्रतु:॥ ३५॥
वसिष्ठ: परमेष्ठी च विवस्वान् सोम एव च।
कर्दमश्चापि य: प्रोक्त: क्रोधो विक्रीत एव च॥ ३६॥
एकविंशतिरुत्पन्नास्ते प्रजापतय: स्मृता:।
तस्य देवस्य मर्यादां पूजयन्त: सनातनीम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा, रुद्र, मनु, दक्ष, भृगु, धर्म, तप, यम, मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वशिष्ठ, परमेष्ठी, सूर्य, चंद्रमा, कर्दम, क्रोध और विकृत - ये इक्कीस प्रजापति एक ही भगवान से उत्पन्न हुए कहे जाते हैं और उसी भगवान के शाश्वत धर्म और मर्यादा का पालन और पूजा करते हैं। 35-37॥
 
Brahma, Rudra, Manu, Daksh, Bhrigu, Dharma, Tapa, Yama, Marichi, Angira, Atri, Pulastya, Pulah, Kratu, Vashishtha, Parmeshthi, Surya, Moon, Kardam, Krodha, and Vikrit – these twenty one Prajapatis are said to have originated from the same God and follow and worship the eternal religion and dignity of the same God. 35-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)