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mahabharat 12.334.32: वह परमेश्वरस्वरूप परमेश्वर ही हम दोनों की उत्पत्ति का कारण है, यह जान लो। हम दोनों उसी की पूजा करते हैं और उसी को अपना देवता तथा पूर्वज मानते हैं। 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.334.32 
तां योनिमावयोर्विद्धि योऽसौ सदसदात्मक:।
आवाभ्यां पूज्यतेऽसौ हि दैवे पित्र्ये च कल्प्यते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वह परमेश्वरस्वरूप परमेश्वर ही हम दोनों की उत्पत्ति का कारण है, यह जान लो। हम दोनों उसी की पूजा करते हैं और उसी को अपना देवता तथा पूर्वज मानते हैं। 32॥
 
That Supreme Being in the form of God is the cause of the origin of both of us, know this. We both worship him and consider him as our god and ancestor. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)