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mahabharat 12.334.28: श्री भगवान बोले - ब्रह्मन् ! तुमने जो प्रश्न पूछा है, वह तुम्हारा अपना गोपनीय विषय है। यद्यपि यह शाश्वत रहस्य किसी को बताने योग्य नहीं है, तथापि तुम्हारे समान भक्त को इसे अवश्य बताना चाहिए; अतः मैं इस विषय का यथार्थ वर्णन करूँगा ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.334.28 
श्रीभगवानुवाच
अवाच्यमेतद् वक्तव्यमात्मगुह्यं सनातनम्।
तव भक्तिमतो ब्रह्मन् वक्ष्यामि तु यथातथम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - ब्रह्मन् ! तुमने जो प्रश्न पूछा है, वह तुम्हारा अपना गोपनीय विषय है। यद्यपि यह शाश्वत रहस्य किसी को बताने योग्य नहीं है, तथापि तुम्हारे समान भक्त को इसे अवश्य बताना चाहिए; अतः मैं इस विषय का यथार्थ वर्णन करूँगा ॥28॥
 
Shri Bhagwan said – Brahman! The question about which you have asked is a confidential matter for yourself. Although this eternal secret is not worth telling to anyone, yet a devotee like you must tell it; Therefore, I will describe this topic realistically. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)