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mahabharat 12.334.25: नारदजी बोले - हे प्रभु! आपकी महिमा समस्त वेदों और पुराणों में उनके अंशों और उपांशों सहित गाई जाती है। आप अजन्मा, नित्य, सबके माता-पिता और अमृतस्वरूप हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.334.25 
नारद उवाच
वेदेषु सपुराणेषु साङ्गोपाङ्गेषु गीयसे।
त्वमज: शाश्वतो धाता माताऽमृतमनुत्तमम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - हे प्रभु! आपकी महिमा समस्त वेदों और पुराणों में उनके अंशों और उपांशों सहित गाई जाती है। आप अजन्मा, नित्य, सबके माता-पिता और अमृतस्वरूप हैं॥ 25॥
 
Naradji said - O Lord! Your glory is sung in all the Vedas and Puranas including their parts and subparts. You are unborn, eternal, mother and father of all and the best form of nectar.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)