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mahabharat 12.334.21: ऐसा मन में विचार करके भगवान नारायण की भक्ति से प्रेरित होकर नारदजी अचानक उन देवताओं के पास प्रकट हुए॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.334.21 
इति संचिन्त्य मनसा भक्त्या नारायणस्य तु।
सहसा प्रादुरभवत् समीपे देवयोस्तदा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ऐसा मन में विचार करके भगवान नारायण की भक्ति से प्रेरित होकर नारदजी अचानक उन देवताओं के पास प्रकट हुए॥21॥
 
Thinking this in his mind, inspired by devotion towards Lord Narayana, Naradji suddenly appeared near those gods. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)