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mahabharat 12.334.2: मनुष्य किस प्रकार शाश्वत स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है ? किस उपाय से उसे परम कल्याण की प्राप्ति हो सकती है ? देवताओं और पितरों के निमित्त उसे किस विधि से हवन करना चाहिए ?॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.334.2 
कुतो ह्यस्य ध्रुव: स्वर्ग: कुतो नै:श्रेयसं परम्।
विधिना केन जुहुयाद् दैवं पित्र्यं तथैव च॥ २॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य किस प्रकार शाश्वत स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है ? किस उपाय से उसे परम कल्याण की प्राप्ति हो सकती है ? देवताओं और पितरों के निमित्त उसे किस विधि से हवन करना चाहिए ?॥2॥
 
How can a man attain eternal heaven? By what means can he attain the ultimate welfare? By what method should he perform havans for the sake of gods and ancestors?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)