Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.334.16-18h: पहले वे एक ही रूप में विद्यमान थे; फिर धर्म की वंश-परंपरा का विस्तार करने के लिए वे चार रूपों में प्रकट हुए। इन चारों ने अपने द्वारा अर्जित धर्म से धर्मदेव की वंश-परंपरा का विस्तार किया है। हे! इस समय इन चारों देवताओं - नर, नारायण, कृष्ण और हरि - ने धर्म पर बड़ी कृपा की है।॥ 16-17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एका मूर्तिरियं पूर्वं जाता भूयश्चतुर्विधा॥ १६॥
धर्मस्य कुलसंताने धर्मादेभिर्विवर्धित:।
अहो ह्यनुगृहीतोऽद्य धर्म एभि: सुरैरिह॥ १७॥
नरनारायणाभ्यां च कृष्णेन हरिणा तथा।
अनुवाद
पहले वे एक ही रूप में विद्यमान थे; फिर धर्म की वंश-परंपरा का विस्तार करने के लिए वे चार रूपों में प्रकट हुए। इन चारों ने अपने द्वारा अर्जित धर्म से धर्मदेव की वंश-परंपरा का विस्तार किया है। हे! इस समय इन चारों देवताओं - नर, नारायण, कृष्ण और हरि - ने धर्म पर बड़ी कृपा की है।॥ 16-17 1/2॥
‘Earlier they existed in one form only; then to expand the lineage of Dharma they appeared in four forms. These four have expanded the lineage of Dharmadev with the Dharma they have acquired. Oh! At this time these four gods – Nara, Narayana, Krishna and Hari – have shown great favour to Dharma.॥ 16-17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥