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mahabharat 12.334.14: राजन! नारदजी सम्पूर्ण लोकों में घूमते रहते थे; अतः वे तीव्रगति वाले ऋषि बदरिकाश्रम के विशाल क्षेत्र में घूमते हुए वहाँ पहुँचे, जो महान प्राणियों से परिपूर्ण था।   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.334.14 
नारद: सुमहद्भूतं सर्वलोकानचीचरत्।
तं देशमगमद् राजन् बदर्याश्रममाशुग:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! नारदजी सम्पूर्ण लोकों में घूमते रहते थे; अतः वे तीव्रगति वाले ऋषि बदरिकाश्रम के विशाल क्षेत्र में घूमते हुए वहाँ पहुँचे, जो महान प्राणियों से परिपूर्ण था।
 
Rajan! Naradji roamed all over the world; Therefore, that fast-moving sage, roaming around in the vast region of Badarika Ashram, reached there, which was full of great creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)