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mahabharat 12.334.13: निश्चय ही उन दोनों की इच्छा के अनुसार हृदय में अन्तर्यामी की प्रेरणा से देवर्षि नारद महामेरु पर्वत के शिखर से गन्धमादन पर्वत पर उतरे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 334: बदरिकाश्रममें नारदजीके पूछनेपर भगवान् नारायणका परमदेव परमात्माको ही सर्वश्रेष्ठ पूजनीय बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.334.13 
नूनं तयोरनुमते हृदि हृच्छयचोदित:।
महामेरोर्गिरे: शृङ्गात् प्रच्युतो गन्धमादनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही उन दोनों की इच्छा के अनुसार हृदय में अन्तर्यामी की प्रेरणा से देवर्षि नारद महामेरु पर्वत के शिखर से गन्धमादन पर्वत पर उतरे॥13॥
 
Certainly, as per the wish of both of them, with the inspiration of Antaryami in his heart, Devarshi Narad descended from the peak of Mahameru mountain to Gandhamadan mountain. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)