श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.333.6 
न बभासे सहस्रांशुर्न जज्वाल च पावक:।
ह्रदाश्च सरितश्चैव चुक्षुभु: सागरास्तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सूरज की रोशनी फीकी पड़ गई। आग नहीं जल रही थी। झीलें, नदियाँ और समुद्र सब व्याकुल हो गए।
 
The sun's light faded. The fire did not burn. The lakes, rivers and seas all became agitated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)