श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.333.5 
द्रुमा: शाखाश्च मुमुचु: शिखराणि च पर्वता:।
निर्घातशब्दैश्च गिरिर्हिमवान् दीर्यतीव ह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पेड़ों ने अपनी शाखाएँ तोड़कर खुद ही गिरा दीं। पहाड़ों ने अपनी चोटियाँ तोड़ दीं। हिमालय मानो बिजली की गड़गड़ाहट से फट गया हो।
 
Trees broke their branches and dropped them on their own. Mountains broke their peaks. The Himalayas seemed to be torn apart by the sound of thunderbolts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)