जो मनुष्य मोक्ष के तत्त्वों से युक्त इस परम पवित्र इतिहास को सुनकर या पढ़कर हृदय में धारण करेगा, वह शान्त हो जाएगा और परम मोक्ष को प्राप्त होगा॥ 42॥
He who after listening to or reading this most sacred history containing the principles of Moksha (Salvation) will keep it in his heart, will become peaceful and attain the ultimate salvation (Salvation). ॥ 42॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकोत्पतनसमाप्तिर्नाम त्रयस्त्रिंशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवजीकी ऊर्ध्वगतिके वर्णनकी समाप्ति नामक तीन सौ तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)