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सोऽनुनीतो भगवता स्वयं रुद्रेण भारत।
छायां पश्यन् समावृत्त: स मुनि: परया मुदा॥ ३९॥
अनुवाद
भरतनन्दन! भगवान शंकर से ऐसा आश्वासन पाकर मुनिवर व्यास अपने पुत्र की छाया सर्वत्र देखते हुए बड़े हर्ष के साथ अपने आश्रम को लौट आये॥39॥
Bharatnandan! On receiving such assurance from Lord Shankar, Munivar Vyas returned to his ashram with great joy, seeing his son's shadow everywhere. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥