श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.333.38 
छायां स्वपुत्रसदृशीं सर्वतोऽनपगां सदा।
द्रक्ष्यसे त्वं च लोकेऽस्मिन् मत्प्रसादान्महामुने॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! मेरी कृपा से आप इस संसार में सदैव अपने पुत्र की परछाईं देख सकेंगे। वह सर्वत्र दिखाई देगा, आपकी दृष्टि से कभी ओझल नहीं होगा।
 
‘Mahamuni! By my grace you will always be able to see the shadow of your son in this world. He will be visible everywhere, he will never disappear from your sight.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)