Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.333.36: ब्रह्मर्षि! इस समय वह ऐसे परमपद को प्राप्त हुआ है, जो इन्द्रियों को वश में न करने वाले पुरुषों और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, फिर आप उसके लिए शोक क्यों कर रहे हैं?॥ 36॥ | mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मर्षि! इस समय वह ऐसे परमपद को प्राप्त हुआ है, जो इन्द्रियों को वश में न करने वाले पुरुषों और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, फिर आप उसके लिए शोक क्यों कर रहे हैं?॥ 36॥
'Brahmarshi! At this time he has attained such a supreme state, which is rare even for the men who have not controlled their senses and for the gods, then why are you mourning for him?॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥