Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.333.34-35: ‘ब्रह्मन्! तुमने पहले मुझसे अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु और आकाश के समान शक्तिशाली पुत्र का वर माँगा था; अतः तुम्हारे तप के प्रभाव से और मेरी कृपा से तुम्हें ऐसा पुत्र प्राप्त हुआ। वह ब्रह्मतेज से युक्त और परम पवित्र था। ॥34-35॥ | mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘ब्रह्मन्! तुमने पहले मुझसे अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु और आकाश के समान शक्तिशाली पुत्र का वर माँगा था; अतः तुम्हारे तप के प्रभाव से और मेरी कृपा से तुम्हें ऐसा पुत्र प्राप्त हुआ। वह ब्रह्मतेज से युक्त और परम पवित्र था। ॥34-35॥
‘Brahman! You had earlier asked me for a boon to have a son as powerful as fire, earth, water, air and sky; hence, due to the effect of your penance and by my grace, you got such a son. He was full of Brahman radiance and was extremely pure. ॥ 34-35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥