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mahabharat 12.333.28-29: उस समय मंदाकिनी नदी के तट पर क्रीड़ा कर रही सभी अप्सराएँ महर्षि व्यास को अपने निकट पाकर अत्यन्त भयभीत हो गईं और लगभग मूर्छित हो गईं। कुछ जल में छिप गईं और कुछ लताओं की झाड़ियों में छिप गईं।   |   mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  12.333.28-29 
ततो मन्दाकिनीतीरे क्रीडन्तोऽप्सरसां गणा:॥ २८॥
आसाद्य तमृषिं सर्वा: सम्भ्रान्ता गतचेतस:।
जले निलिल्यिरे काश्चित् काश्चिद् गुल्मान् प्रपेदिरे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस समय मंदाकिनी नदी के तट पर क्रीड़ा कर रही सभी अप्सराएँ महर्षि व्यास को अपने निकट पाकर अत्यन्त भयभीत हो गईं और लगभग मूर्छित हो गईं। कुछ जल में छिप गईं और कुछ लताओं की झाड़ियों में छिप गईं।
 
At that time all the Apsaras who were playing on the banks of the Mandakini river were very frightened on finding Maharishi Vyas near them and almost fainted. Some hid themselves in the water and some in the thicket of creepers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)