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mahabharat 12.333.27-28h: अपने यशस्वी पुत्र की महानता देखकर व्यास जी पर्वत की चोटी पर बैठकर उसका ध्यान करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  12.333.27-28h 
महिमानं तु तं दृष्ट्वा पुत्रस्यामिततेजस:॥ २७॥
निषसाद गिरिप्रस्थे पुत्रमेवानुचिन्तयन्।
 
 
अनुवाद
अपने यशस्वी पुत्र की महानता देखकर व्यास जी पर्वत की चोटी पर बैठकर उसका ध्यान करने लगे।
 
Seeing the greatness of his illustrious son, Vyasa sat on the top of the mountain, meditating on him. 27 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)