श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.333.26-27h 
अन्तर्हित: प्रभावं तु दर्शयित्वा शुकस्तदा॥ २६॥
गुणान् संत्यज्य शब्दादीन् पदमभ्यगमत् परम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपना प्रभाव दिखाकर शुकदेवजी अन्तर्धान हो गए और वचन आदि गुणों का त्याग करके परम पद को प्राप्त हुए ॥26 1/2॥
 
By showing his influence in this way, Shukdevji disappeared and after renouncing the qualities like words etc., he attained the supreme position. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)