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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  12.333.24-25h 
तत एकाक्षरं नादं भोरित्येव समीरयन्॥ २४॥
प्रत्याहरज्जगत‍् सर्वमुच्चै: स्थावरजङ्गमम्।
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही समस्त जीव जगत ने एक अक्षर वाले शब्द 'भो' का उच्च उच्चारण करके प्रतिक्रिया व्यक्त की।
 
Along with that, the entire living world responded by loudly pronouncing the one-syllable word 'Bho'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)