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mahabharat 12.333.23-24h: जब पिता ने तीनों लोकों में गूंजती हुई ऊँचे स्वर से पुकारा, तब धर्मात्मा शुकने सर्वव्यापी, सर्वात्मा और सर्वान्तर्यामी होने से सम्पूर्ण जगत् में 'भोः' शब्द से गूंजकर पिता को उत्तर दिया ॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 333: शुकदेवजीकी परमपद-प्राप्ति तथा पुत्र-शोकसे व्याकुल व्यासजीको महादेवजीका आश्वासन देना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  12.333.23-24h 
स्वयं पित्रा स्वरेणोच्चैस्त्रील्‍ँलोकाननुनाद्य वै।
शुक: सर्वगतो भूत्वा सर्वात्मा सर्वतोमुख:॥ २३॥
प्रत्यभाषत धर्मात्मा भो शब्देनानुनादयन्।
 
 
अनुवाद
जब पिता ने तीनों लोकों में गूंजती हुई ऊँचे स्वर से पुकारा, तब धर्मात्मा शुकने सर्वव्यापी, सर्वात्मा और सर्वान्तर्यामी होने से सम्पूर्ण जगत् में 'भोः' शब्द से गूंजकर पिता को उत्तर दिया ॥23 1/2॥
 
When the Father called out with a loud voice resonating in the three worlds, then the Dharmatma Shukne, being omnipresent, omnisoul and omnipresent, responded to the Father by resonating with the entire world with the word 'Bhoh'. 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)